Medieval history of india

* भारत पर अरबों का आक्रमण

  • भारत पर सबसे पहले “मौ0 बिन कासिम” ने (अरबों ने) 712 ई० में सिंध पर आक्रमण किया और विजय प्राप्त की। उस समय सिंध पर “दाहिर” का शासन था। सिंध पर आक्रमण का आदेश अरब के सूबेदार अल-हज्जाज ने दिया था।
  • भारत पर अरबों के आक्रमण का प्रमुख उद्देश्य धन-दौलत लूटना तथा “इस्लाम धर्म” का प्रचार करना था। अरबों के सिंध विजय की जानकारी “चचनामा” से प्राप्त होती है।
  • मुहम्मद बिन कासिम 712 ई० में जुनैद को सिंध का राज्यपाल नियुक्त कर भारत से वापस लौट गया। जुनैद को प्रतिहार शासक नागभट्ट ने पराजित किया।
  • अरबों ने सिंध में ऊँट पालन और खजूर की खेती का प्रचलन किया।

* महमूद गजनी

  • महमूद गजनी के पिता का नाम “सुबुक्तगीन” था। महमूद गजनी का जन्म 971 ई. में हुआ था। महमूद गजनी 998 ई. में राजगद्दी पर बैठा ।
  • महमूद गजनी ने भारत पर पहला आक्रमण 1000 ई. में पेशावर पर किया। महमूद गजनी ने भारत पर 17 बार आक्रमण किया। इसके आक्रमण का प्रमुख उद्देश्य भी धन को लूटना था। महमूद गजनी एक मूर्तिभंजक आक्रमणकारी था।
  • महमूद गजनी ने 1001 ई. में राजा जयपाल को हराया। महमूद गजनी ने 1025 ई. में सोमनाथ के मन्दिर (सौराष्ट्र, गुजरात) पर आक्रमण किया। इस आक्रमण के समय उसने 50,000 हिन्दुओं का कत्ल किया था।
  • महमूद गजनी का भारत पर अन्तिम आक्रमण 1027 ई. में जाटों के विरूद्ध था। सुल्तान की उपाधि धारण करने वाला पहला शासक था।
  • महमूद गजनी की मृत्यु 1030 ई. में हुई। अलबरूनी, फिरदौसी तथा फरूखी महमूद गजनी के दरबार में रहते थे।
  • शाहनामा की रचना फिरदौसी ने की तथा “किताब-उल-हिन्द की रचना अलबरूनी ने की। ये दोनों महमूद गजनी के साथ भारत आये थे।

* मुहम्मद गोरी

  • मौ० गोरी ने भारत पर पहला आक्रमण 1175 ई. में मुल्तान पर किया। मौ० गोरी ने दूसरा आक्रमण 1178 ई. में पाटन (गुजरात) पर किया। पाटन के शासक भीम-II ने मौ0 गौरी को बुरी तरह हराया।
  • चन्दावर का युद्ध “मौ० गोरी और जयचन्द के बीच 1194 ई. को हुआ। इसमें गोरी की जीत हुई। मौ० गोरी ने 1193 ई. में दिल्ली को अपनी राजधानी बनाया।
  • मौ० गोरी की हत्या 1206 ई. को हुई।

* गुलाम वंश: (1206-1290 ई. तक)

  • गुलाम वंश की स्थापना 1206 ई. में कुतुबुद्दीन ऐबक ने की थी। वह मौ0 गौरी का गुलाम था। मौ० गोरी के समय वह दिल्ली का गवर्नर था
  • कुतुबुद्दीन ऐबक ने अपनी राजधानी ‘लाहौर बनायी।
  • कुतुबुद्दीन को लाख बख्श भी कहा जाता है जिसकाअर्थ है लाखों का दान देने वाला।
  • कुतुबुद्दीन ऐबक ने दिल्ली की कुवत-उल-इस्लाम मस्जिद तथा अजमेर का अढ़ाई दिन का झोपड़ा नामक मस्जिद का निर्माण करवाया। दिल्ली की कुतुबमीनार का निर्माण कुतबुद्दीन ऐबक ने करवाया। उसने अपनी पुत्री की शादी इल्तुतमिश से की थी। कुतुबुद्दीन ऐबक का अर्थ चन्द्रमुखी होता है।
  • नालंदा विश्वविद्यालय को ध्वस्त बख्तियार खिलजी ने करवाया, जो ऐबक का सेनापति था।
  • कुतबुद्दीन ऐबक की मृत्यु 1210 ई. में “चोगान (पोलो) खेलते हुए घोड़े से गिरकर हो गयी। इसे लाहौर में दफनाया गया।
  • कुतबुद्दीन ऐबक का उत्तराधिकारी आरामशाह” हुआ जिसकी हत्या 1211 ई. में इल्तुतमिश ने की और दिल्ली की गद्दी पर बैठा। “इक्ताप्रणाली” इल्तुतमिश ने चलायी। वह दिल्ली सल्तनत का वास्तविक संस्थापक था। इसने 40 गुलामो का एक संगठन बनाया जिसे’तुर्कान-ए-चहलगानी के नाम से जाना जाता है। इल्तुतमिश तुर्क था।
  • इल्तुतमिश ने सबसे पहले शुद्ध अरबी सिक्के जारी किए।
  • चाँदी के सिक्को को “टका‘ तथा ताँबे के सिक्कों को “जीतल” कहा जाता था।
  • इल्तुतमिश तुर्क था, वह कुतुबुद्दीन ऐबक का गुलाम तथा ‘दामाद था। कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु के समय यह बदांयू का गवर्नर था। यह अपनी राजधानी ‘लाहौर‘ से बदलकर ‘दिल्ली‘ लाया। ‘इल्तुतमिश पहला शासक था 1229 ई. में बगदाद के खलीफा से सुल्तान पद की स्वीकृति ली ।
  • भारत में पहला मकबरा निर्मित कराने का श्रेय इल्तुतमिश को है। चंगेज खाँ ने भारत पर 1221 ई. में इल्तुतमिश के समय में आक्रमण किया।
  • इल्तुतमिश की मृत्यु 1236 ई. में हुई।इल्तुतमिश के बाद उसका पुत्र रूकनुद्दीन फिरोज गद्दी पर बैठा यह एक अयोग्य शासक था। शासन की बागडोर उसकी माँ शाह तुर्कान के हाथ में थी।
  • तुर्की के अमीरो ने इसको गद्दी से हटा दिया और रजिया सुल्तान” को राजगद्दी पर बैठाया।
  • रजिया बेगम’ पहली मुस्लिम महिला शासक थी जिसने शासन की बागडोर संभाली। • वह “पर्दाप्रथा” का त्याग कर पुरूषों की तरह दरबार में आने लगी।
  • रजिया की शादी ‘अल्तूनिया‘ से हुई रजिया की हत्या 1240 ई. में हिन्दु डाकुओ द्वारा कैथल में कर दी गई। वह प्रथम तुर्क महिला शासक थी।
  • 1246 ई. में ‘नसरूद्दीन महमूद दिल्ली का शासक बना। नसरुद्दीन महमूद ‘टोपी सीकर अपना जीवन निर्वाह करता था। बलबन में अपनी पुत्री का विवाह “नसरुद्दीन महमूद के साथ किया 1265 ई. में नसरूद्दीन महमूद की मृत्यु के बाद बलबन उसका उत्तराधिकारी बना।
  • बलबन का वास्तविक नाम ‘बहाऊद्दीन था। यह “इल्तुतमिश का गुलाम था ।
  • बलबन 1265 ई. में दिल्ली की गद्दी पर बैठा। इसने दिल्ली को मंगोलों के आक्रमण से बचाया।
  • ‘बलवन’ ने 40 गुलामों के संगठन का विनाश कर दिया। बलबन ने “सिजदा और पैबोस‘ नामक प्रथा चलाई। “बलबन ने फारसी त्यौहार “नवरोज मनाने की प्रथा आरम्भ की।
  • ‘नसरूद्दीन महमूद ने बलबन को ‘उलंग खाँ की उपाधि दी थी। बलबन के दरबार में फारसी के प्रसिद्ध कवि अमीर खुसरो तथा अमीर हसन रहते थे।
  • बलबन ने अपने शत्रुओं के विरुद्ध ‘लौह एवं रक्त की नीति अपनाई बलबन की न्याय व्यवस्था निष्पक्ष थी। बलबन के बाद उसका पुत्र कैखुसरव शासक बना। उसकी मृत्यु लकवे से हो गयी।
  • गुलाम वंश का अंतिम शासक समसुधिन क्यूमर्स था।

* खिलजी वंश ( 1290 ई - 1320 ई )

  • खिलजी वंश की स्थापना 1290 ने फिरोज खिलजी ने की तथा इसने किलोखरी को अपनी राजधानी बनाया।
  • फिरोज खिलजी की हत्या 1296 में उसके भतीजे तथा उसके दामाद अलाउद्दीन खिलजी ने कड़ा मानिकपुर ( इलाहाबाद ) में कर दी।
  • अलाउद्दीन के बचपन का नाम अली तथा गुर्शास्प था।
  • अलाउद्दीन खिलजी ने बेईमानी को रोकने के लिए मूल्य नियंत्रण प्रणाली या बाजार नियंत्रण प्रणाली की व्यवस्था की।
  • अलाउद्दीन खिलजी ने सिकंदर ए सानी की उपाधि धारण की।
  • अलाउद्दीन खिलजी ने अलाई दरवाजा तथा सीरी का किला बनवाया।
  • अलाउद्दीन खिलजी की सेनापति का नाम मलिक काफूर था।
  • घोड़ों को दागने तथा सैनिकों का हुलिया लिखने की प्रथा का आरंभ अलाउद्दीन खिलजी ने किया।
  • अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु 1316 में हो गई इसके बाद मुबारक खिलजी राजा बना।
  • मुबारक खिलजी की हत्या उसके वजीर खुसरो शाह ने 1320 में कर दी और दिल्ली के सिंहासन पर बैठा था खुसरो शाह की हत्या गाजी मलिक ( गयासुद्दीन तुगलक ) ने की।

* तुगलक वंश ( 1320 ई - 1398 ई )

  • 1320 ईस्वी में गयासुद्दीन तुगलक खुसरो शाह को पराजित करके दिल्ली के शासन पर बैठा।
  • इसने सिंचाई के लिए कुएं तथा नहरों का निर्माण करवाया। नहरों का निर्माण कराने वाला यह प्रथम शासक था।
  • गयासुद्दीन तुगलक ने दिल्ली में तुगलकाबाद की स्थापना की। इस नगर में रोमन शैली में एक दुर्ग का निर्माण करवाया जिससे 56 कोट कहते हैं।
  • गयासुद्दीन की मृत्यु 1325 में जूना खान द्वारा निर्मित लकड़ी के महल के नीचे दबकर हो गई। इसके बाद जूना खा मोहम्मद बिन तुगलक के नाम से दिल्ली की गद्दी पर बैठा। मध्यकालीन सभी सुल्तानों में मोहम्मद बिन तुगलक सबसे शिक्षित योग्य व्यक्ति था।
  • मोहम्मद बिन तुगलक को पागल बादशाह भी कहते हैं। इसने कृषि के विकास के लिए अमीर एक को ही नामक विभाग की स्थापना की। इसने अपनी राजधानी दिल्ली से देवगिरी को बनाया और उसका नाम दौलताबाद रखा। वह फिर से 1335 में अपनी राजधानी को दिल्ली ले गया।
  • मोहम्मद बिन तुगलक ने सांकेतिक मुद्रा का प्रचलन किया। मोहम्मद बिन तुगलक पहला सुल्तान था जो हिंदुओं के त्यौहार में भाग लेता था।
  • मोहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु 1351 में हो गई थी।
  • मोहम्मद बिन तुगलक शेख अलाउद्दीन का शिष्य था।
  • 1351 में फिरोजशाह तुगलक शासक बना।
  • फिरोजशाह तुगलक उड़ीसा के जगन्नाथ मंदिर को ध्वस्त करवा दिया था।
  • फिरोजशाह तुगलक ब्राह्मणों पर जजिया कर लगाने वाला पहला मुसलमान शासक था।
  • फिरोजशाह तुगलक ने जौनपुर, फिरोजपुर, फिरोजाबाद तथा फतेहाबाद जैसे 300 नगर की स्थापना की।
  • तुगलक वंश का अंतिम शासक नसीरूद्दीन महमूद शाह तुगलक था।
  • मोरक्को यात्री इब्न बतुता की पुस्तक रेहला में मुहम्मद तुगलक के समय की घटनाओं का वर्णन है।
  • मोहम्मद बिन तुगलक को अपनी सनक भारी योजनाओं क्रूर कृतियां एवं दूसरों के सुख-दुख के प्रति उपेक्षा भाव रखने के कारण स्वप्नशील , पागल एवं रक्तपिपाशु कहा गया।

* सैय्यद वंश ( 1414 ई - 1452 )

  • सैयद वंश की स्थापना खिज्र खां ने की थी।
  • खिज्र खान ने रैयत आला की उपाधि धारण की।
  • खिज्र खां तैमूर लंग का सेनापति था।
  • सैयद वंश का अंतिम सुल्तान अलाउद्दीन आलम शाह था।
  • यमुना के किनारे मुबारकाबाद की स्थापना मुबारक शाह ने की थी

* लोदी वंश ( 1451 ई - 1526 ई तक )

  • लोदी वंश की स्थापना बहलोल लोदी ने की थी। बहलोल लोदी 1451 में गाजी की उपाधि के साथ दिल्ली की गद्दी पर बैठा।
  • दिल्ली पर प्रथम अफगान राज्य की स्थापना बहलोल लोदी ने की थी
  • बहलोल लोदी का पुत्र निजाम खान ( सिकंदर लोदी ) ने आगरा नगर की स्थापना 1504 में की थी।
  •  सिकंदर लोदी ने आगरा को अपनी राजधानी बनाया। सिकंदर लोदी ने कुतुबमीनार की मरम्मत कराई थी।
  • गले की बीमारी के कारण सिकंदर लोदी की मृत्यु 1517 को होगई।
  • सिकंदर लोदी के मृत्यु के दिन ही उसका पुत्र इब्राहिम लोदी गद्दी पर बैठा।
  • 21 अप्रैल 1526 को पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी , बाबर से हार गया। इब्राहिम लोदी एकमात्र सुल्तान था जो युद्ध भूमि में मारा गया।
  • बाबर को भारत पर आक्रमण करने के लिए पंजाब के राजा दौलत खा लोदी तथा इब्राहिम लोदी के चाचा आलम खान ने बुलाया था। 
  • प्रशासन की सबसे छोटी इकाई ग्राम होता था। 

* विजयनगर साम्राज्य

  • विजयनगर साम्राज्य की स्थापना 1336 ई.में हरिहर एवं बुक्का का नमक दो भाइयों ने की थी।
  • हरिहर एवं बुक्का ने अपने पिता संगम के नाम पर संगम राजवंश की स्थापना की।
  • विजयनगर साम्राज्य की राजधानी हम्पी थी और यह तुंगभद्रा नदी पर स्थित है।
  • इटली का यात्री निकोलों कांटी विजयनगर की यात्रा पर देवराय प्रथम के शासनकाल में आया।
  • संगम वंश का सबसे प्रतापी राजा देवराय द्वितीय था, इसे इमादी देवराय भी कहा जाता था।

* बहमनी राज्य

  • मोहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में 1347 ई. में हसन गंगू ने बहमनी राज्य की स्थापना की।
  • बहमनी राजाओं की राजधानी गुलबर्गा थी।
  • सिहाबुद्दीन अहमद प्रथम ने अपनी राजधानी गुलबर्गा से हटकर बीदर में स्थापित की।

* मुगल साम्राज्य

  • मुगल वंश का संस्थापक बाबर था।
  • बाबर ने मुगल वंश की स्थापना के साथ ही पद पादशाही की स्थापना की जिसके तहत शासक को बादशाह कहा जाता था।

* बाबर ( 1526 - 1530 )

  • बाबर का जन्म 1483 ई. में हुआ था।  इसके पिता उमर शेख मिर्जा फरगाना नाम छोटे राज्य के शासक
    थे।
  • बाबर फरगाना की गद्दी पर 8 जून 1494 ई. में बैठा।
  • बाबर ने 1507 ई. में बादशाह की उपाधि धारण की जिसे अब तक किसी तैमूर शासक ने धारण नहीं की थी।
  • बाबर ने भारत पर 5 बार आक्रमण किया।
  • पानीपत के प्रथम युद्ध में बाबर ने पहली बार तुगलमा युद्ध नीति एवं तोपखाने का प्रयोग किया था।
  • बाबर को अपनी उदारता के लिए कलंदर की उपाधि दी गई।
  • खानवा युद्ध में विजय के बाद बाबर ने गाजी की उपाधि धारण की थी।
  • 48 वर्ष की आयु में 26 दिसंबर 1530 ई. को आगरा में बाबर की मृत्यु हो गई।
  • प्रारंभ में बाबर के शव को आगरा के आराम बाग में दफनाया गया बाद में काबुल में उसके द्वारा चुने गए स्थान पर दफनाया गया।
  • बाबर ने अपनी आत्मकथा बाबरनामा की रचना की जिसका अनुवाद बाद में फारसी भाषा में अब्दुल रहीम खानखाना ने किया।
  • बाबर को मुबईयान नामक पद शैली का जन्मदाता माना जाता है।
  • बाबर प्रसिद्ध नक्शबंदी सूफी ख्वाजा उबैदुल्ला अहरार का अनुयाई था।
  • बाबर का उत्तराधिकारी हुमायूं हुआ।

* हुमायूं ( 1530 - 1556 )

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